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Kadambini Ganguly Google Doodle: जानिए कौन हैं कादंबिनी गांगुली, जिनके लिए गूगल ने बनाया है डूडल

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Kadambini Ganguly (कादंबिनी गांगुली)  Google Doodle: 1883 में, गांगुली और उनके साथी चंद्रमुखी बसुइन भारतीय इतिहास में ग्रेजुएट करने वाली पहली महिला बनीं। Kadambini Ganguly (कादंबिनी गांगुली) Google Doodle: गूगल डूडल ने रविवार को भारत में चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षित होने वाली पहली महिला कादंबिनी गांगुली को उनके 160वें जन्मदिन पर याद किया। डूडल को बेंगलुरु के कलाकार ओड्रिजा ने चित्रित किया है। 18 जुलाई, 1861 को भागलपुर ब्रिटिश भारत, अब बांग्लादेश में जन्मी गांगुली महिला मुक्ति के लिए एक मुखर कार्यकर्ता, एक डॉक्टर और एक स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनके पिता, भारत के पहले महिला अधिकार संगठन के सह-संस्थापक, ने गांगुली को स्कूल तब स्कूल भेजा जब भारतीय महिलाओं के लिए शिक्षा असामान्य थी। 1883 में, गांगुली और उनके साथी चंद्रमुखी बसुइन भारतीय इतिहास में स्नातक करने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने 1886 में ग्रेजुएट की उपाधि प्राप्त की, एक बार फिर भारतीय-शिक्षित डॉक्टर बनने वाली पहली महिला के रूप में इतिहास रच दिया। यूनाइटेड किंगडम में काम करने और अध्ययन करने के बाद, उन्होंने स्त्री रोग में विशे...

Powerful mantra and chaupai of Ramcharitmanas to win in battle and war

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रामचरित्र मानस की चौपाई को रोज बोलने से आपको हर प्रकार के युद्ध एवं लड़ाई में विजय प्राप्त होगी यह बात आप सभी जानते हैं कि हिंदुस्तान के संस्कृति में रामचरितमानस का एक बहुत ही ज्यादा प्रतिष्ठित एवं सम्मानित ग्रंथ है जिसके अंदर इतने ज्यादा शक्तिशाली मंत्र एवं चौपाइयां हैं जिनका यदि नित्य पाठ किया जाए तो प्राणी अपने जीवन से बड़ी से बड़ी कठिनाइयों से मुक्ति प्राप्त कर अपने जीवन को सफलतापूर्वक जी सकता है। रामचरित्र मानस में दिए गए मंत्रों एवं चौपाइयों का लाभ उठाने के लिए किसी विशेष विधि-विधान की जरूरत नहीं होती। केवल मात्र हनुमानजी महाराज तथा भगवान श्रीराम को स्मरण कर सच्चे मन से इनका जप करें और तुरंत ही आपकी समस्या का समाधान हो जाता है।  आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको राम चरित्र मानस के उस चौपाई के बारे में बताएंगे जिस चौपाई को पढ़कर आपके जीवन में किसी भी प्रकार की लड़ाई युद्ध चल रहा हो उस पर आप आसानी से विजय प्राप्त कर सकते हैं तो चौपाई कुछ इस प्रकार है नीचे दी गई आप चौपाई को अवश्य ही पाठ करें : झगड़े में विजय प्राप्ति के लिए कृपादृष्‍टि करि वृष्‍टि प्रभु अभय किए सुरवृन्द। भालु को...

shiv aavahan mantra lyrics in hindi pdf | शिव आह्वाहन मंत्र lyrics

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  Shiv aavahan mantra in sanskrit/hindi शिव आह्वाहन मंत्र ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन । तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने । आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने । नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः । नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।। नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च । नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।। देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् । नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् । सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।।

स्वर्ग प्राप्ति मंत्र | Swarg Prapti Mantra lyrics in hindi

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  स्वर्ग की प्राप्ति के लिए नित्य करें इस मंत्र का पाठ इस लेख में आपको दो मंत्र बताऊंगा, इन दो मंत्रों में से आप कोई सा भी मंत्र नित्य बोल सकते हैं। इन मंत्रों को बोलने के बाद मनुष्य के मरने के बाद, उसकी अधोगति नहीं होती है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। Comment section में "जय माता दी" जरूर लिखिएगा और यदि आपका कोई सवाल हो या कोई शंका हो तो जरूर बताएं हम उसका समाधान अवश्य देंगे। घर में दुर्गा माता की कोई फोटो लेकर आए या फिर मूर्ति की स्थापना करेंगे तो अति उत्तम होगा और नित्य उसका पूजन करें, हाथ में जल लेकर माता से प्रार्थना करनी चाहिए की हे माता जी मेरी मृत्यु के पश्चात मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो और ऐसा बोल कर हाथ से चल छोड़ कर, दीपक जलाने के पश्चात इन मंत्रों का नित्य पाठ करना चाहिए । और मंत्र बोलते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन मंत्रों को बोलते समय आपके मुंह से आवाज ना निकले, इन मंत्रों का पाठ आपको मन ही मन करना है। इन मंत्रों का पाठ 11 बार 21 बार या जितनी बार आपका मन चाहे उतने बार आप इनका जप कर सकते हैं और यह दोनों मंत्र कुछ इस प्रकार है। ।।1।। सर्वभूता यदा देवी...

Vishnu Gayatri Mantra lyrics & meaning in Hindi | विष्णु गायत्री मंत्र हिन्दी अर्थ

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  विष्णु गायत्री मंत्र भगवान विष्णु त्रिदेवों में से एक है जो दुनिया के पालनकतॉ है उन को प्रसन्न करके हम अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।  भगवान विष्णु मंत्र  के द्वारा हम भगवान विष्णु को प्रसन्न कर सकते हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु त्रिदेवों में से एक देव हैं। त्रिदेव यानी ब्रह्म, विष्णु, और महेश ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं, विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता और महेश सृष्टि के संहारक हैं। ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ Om Shri Vishnave Cha Vidmahe Vasudevaya Dhimahi। Tanno Vishnuh Prachodayat॥ अर्थ –  ओम, मुझे भगवान विष्णु पर ध्यान केंद्रित करने दे, हे भगवान विष्णु मुझे उच्च विद्या दें, और भगवान विष्णु मेरे मस्तिष्क को प्रकाशित करें।

Benefits of drinking hot water | गर्म पानी पीने के फायदे

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गुनगुना पानी क्यों है बेहतर: ठंडा पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में कम कारगर, गुनगुना पानी बॉडी आसानी से एब्जॉर्ब करती है; जानिए इसके 5 बड़े फायदे डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी। जर्नल फ्रंटियर इन साइकोलॉजी में पब्लिश रिसर्च कहती है, अगर शरीर 15 मिनट तक भी डिहाइड्रेट रहता है तो यह हमारे मूड और ध्यान पर बुरा असर डाल सकता है। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, एक युवा महिला को 2.69 लीटर और पुरुष को 3.69 लीटर पानी रोजाना पीना चाहिए। ठंडे पानी की तुलना में गुनगुना पानी शरीर को ज्यादा हाइड्रेट रखता है। इसका कारण यह है कि शरीर इसे तेजी से एब्जॉर्ब करता है। समझिए शरीर में पानी की कमी के दो संकेत शरीर में पानी की कमी जानने का सबसे पुराना तरीका यूरीन के रंग में बदलाव है, लेकिन इसके अलावा भी दो संकेत हैं जो डिहाइड्रेशन की जानकारी देते हैं। बार-बार मीठा खाने का मन करना :  पानी की कमी होने पर लिवर ग्लाइकोजन (स्टोर की हुई शुगर) रिलीज नहीं कर पाता है। ऐसे में व्यक्ति को मीठा खाने की इच्छा होती है क्योंकि शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज रिलीज नहीं कर पाता। स्किन टेस्ट:  इस टेस्ट को करने के लि...

shani chalisa lyrics in hindi pdf download | श्री शनि चालीसा डाउनलोड | The Aakash KV

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॥  श्री शनि चालीसा  ॥   श्री शनि चालीसा पाठ करने से शनि देव होते हैं प्रसन्न ॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥ ॥चौपाई॥ जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥ परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमके॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥ Shani chalisa lyrcis in hindi pdf document download पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥ सौरी, मन्द, शनि, दशनामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥ जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं। रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥ पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥ राज मिलत वन रामहिं दीन्हो। कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो॥ बनहूं में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥ लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥ रावण की गति मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥ दियो ...

शिव तांडव स्तोत्र पाठ करने के फायदे, लाभ, नियम, विधि | benefits of shiv tandav stotram in hindi

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A mazing benefits of shiv tandav stotram | क्या होगा अगर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करेंगे रोज़ाना ? 🤯 शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने के फ़ायदे और लाभ - जो मनुष्य शिवतांडव स्तोत्र द्वारा भगवान शिव की स्तुति करता है, उससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। नियमित रूप से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से कभी भी धन-सम्पति की कमी नहीं होती है। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से साधक को साथ ही उत्कृष्ट व्यक्तित्व की प्राप्ति होती है।  यह पाठ करने से व्यक्ति का चेहरा तेजमय होता है, आत्मबल मजबूत होता है।   शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने से मन की कामना पूर्ण हो जाती है।  माना जाता है कि प्रतिदिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से वाणी की सिद्धि भी प्राप्त की जा सकती है।  भगवान शिव नृत्य, चित्रकला, लेखन, योग, ध्यान, समाधी आदि सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं, इसलिए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से इन सभी विषयों में सफलता प्राप्त होती है।  शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से शनि दोष को कुप्रभावों से भी छुटकारा मिलता है।  जिन लोगों की कुण्डली में सर्प योग, कालसर्प योग या पितृ दोष लगा हु...

Snan mantra | स्नान करने के नियम, मंत्र, आप भी जानें

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  स्नान मन्त्र मंत्र क्या है ? मंत्र शब्द मन +त्र के संयोग से बना है !मन का अर्थ है सोच ,विचार ,मनन ,या चिंतन करना ! और “त्र ” का अर्थ है बचाने वाला , सब प्रकार के अनर्थ, भय से !लिंग भेद से मंत्रो का विभाजन पुरुष ,स्त्री ,तथा नपुंसक के रूप में है !पुरुष मन्त्रों के अंत में “हूं फट ” स्त्री मंत्रो के अंत में “स्वाहा ” ,तथा नपुंसक मन्त्रों के अंत में “नमः ” लगता है ! मंत्र साधना का योग से घनिष्ठ सम्बन्ध है… स्नान करने के नियम, मंत्र, आप भी जानें स्नान करने से शरीर तो साफ होता ही है। परन्तु स्नान के साथ-साथ आपको कुछ शक्तियों का भी आभास होता है। जब आप किसी भी देवी-देवता को मंत्रों के साथ स्नान कराते हैं तो मन ही मन में मंत्र बोले जाते हैं। इसके साथ ही जब आप स्वयं भी स्नान करते हैं तो आप भी कुछ खास मंत्रों का जाप कर सकते हैं, जिससे की आप स्नान सफल हो जाएं तो आइए आप भी जानें स्नान मंत्र, मंत्र की विधि, मंत्र के नियम के बारें में जरुरी बातें। धनवान बनने के लिए स्नान करते समय जपें बस यह एक मंत्र वैदिक पद्धति में कहा है की प्रतिदिन स्नान करते समय इस मंत्र का स्मरण करके स्नान करना चाहिये |...

सुबह उठते ही करें इस मंत्र का जाप, सभी काम हो जाएंगे पूरे और सकारात्मक बीतेगा दिन

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  सुबह उठते ही करें इस मंत्र का जाप, सभी काम हो जाएंगे पूरे और सकारात्मक बीतेगा दिन शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए, इसके बाद सूर्य नमस्कार शुरू करके दिन शुरु करना चाहिए लेकिन भागती-दौड़ती जिंदगी में अक्सर यह सम्भव नहीं हो पाता कि हम सुबह सूर्योदय से पहले उठ सकें।  ऐसे में हम सुबह कभी भी उठकर एक मंत्र का जाप कर सकते हैं, जिससे दिन की शुरुआत सकारात्मकता के साथ हो सके।      सुबह उठते ही करें इस मंत्र का जाप  सूर्योदय -sunrise gif image कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥ अर्थात :  हाथ के अग्र भाग में देवी लक्ष्मी, मध्य भाग में मां सरस्वती तथा मूल भाग में परमबह्मा गोविंद का निवास होता है।  सुबह उठकर हथेलियों के दर्शन करने से इन सभी के दर्शन होते हैं। मंत्र के जाप के बाद स्नान   आप इस मंत्र का जाप सुबह उठते ही बिस्तर पर बैठकर इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।  इसके बाद आप नित्य क्रिया से निपट कर पानी में गंगा जल डालकर स्नान करें।  वीरवार के दिन पीले रंग के कपड़े और पीले रंग ...

मां बगलामुखी देवी कौन है ?

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माँ बगलामुखी फोटो hd मां बगलामुखी बगलामुखी देवी दस महाविद्याओं में से एक हैं। यह आठवीं महाविद्या और स्तम्भन की देवी मानी जाती हैं। बगलामुखी देवी अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर उन्हें भयमुक्त करती हैं। इन्हें पीताम्बरा के नाम से भी जाना जाता हैं। इन्हें पीला रंग अधिक पसंद है। देवी रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान होती हैं तथा उनके भक्तों को तीन लोकों में कोई पराजित नहीं कर सकता। बगला शब्द संस्कृत भाषा से आया है जिसका अर्थ है दुल्हन। बगलामुखी रूप में देवी अपने अलौलिक सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करती हैं।    पौराणिक कथा  एक मान्यता के अनुसार एक बार ब्रह्मांड में तूफान आया। तूफान आने से समस्त सृष्टि में प्रलय आ गया। सभी जीव-जन्तु नष्ट होने लगे। इस विनाशकारी तूफान से देवता भी बहुत चिंतित हो गए। भगवान विष्णु ने चिंतामग्न होकर इस तूफान को खत्म करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने देवी की आराधना की। देवी प्रसन्न हो गयीं और उन्होंने बगलामुखी के रूप में अवतार लिया। बगलामुखी महाविद्या को विष्णु के तेज से सम्पन्न होने के कारण वैष्णवी भी कहा जाता है।     मां बगलामुखी की पूजा ...

Why Lord Ram killed Bali ? श्री राम ने बाली को क्यों मारा ?

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श्री राम ने बाली को क्यों मारा वह चाहते तो पाली को क्षमा भी तो कर सकते थे क्योंकि बाली ने जब सुग्रीव को सिंहासन पर बैठा देगा तो वाले को तो ऐसा ही लगा कि सुग्रीव ने जानबूझ कर उसे गुफा में बंद कर दिया ताकि वह सिंहासन और उसकी बीवी को हड़प सके , श्री राम यदि चाहते तो बाली को समझाते कि सुग्रीव ने जो कुछ किया अनजाने में किया और इस बात पर भी हम सभी को पूरा भरोसा है कि यदि श्री राम स्वयं वाले को समझाते तो बारिश पर यकीन भी कर लेते हैं की सुग्रीव निर्दोष है। लेकिन फिर भी, फिर भी श्री राम ने बाली को क्यों मारा यह सवाल हम सबके दिमाग में घूमता रहता है।  तो आज इसी का सही और सटीक उत्तर को जान लेते हैं :  सबसे पहली बात तो यह है कि बाली को अपनी शक्ति पर अपनी ताकत पर इतना ज्यादा घमंड था कि उसे सुग्रीव की बात को सुनना कुछ लग रहा था और साथ ही यदि एक पल को मान लेते हैं कि बाली से ही सब कुछ अनजाने में हुआ लेकिन जो हुआ सो हुआ परंतु उसने तो सुग्रीव को मार कर भाग आने के बाद उसकी पत्नी को भी हड़पने का प्रयास किया उस पर बुरी नजर डाली।  और जब श्री राम बाली का वध कर देते हैं तो वाली कहता है कि यदि आप...

अश्वत्थामा कौन थे ? | Who is Ashwathama ? | Ashwathama in hindi |

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अश्वत्थामा कौन थे ? Who is Ashwathama ? अश्वत्थामा महाभारतकाल अर्थात द्वापरयुग में जन्मे थे। उनकी गिनती उस युग के श्रेष्ठ योद्धाओं में होती थी। वे गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र व कुरु वंश के राजगुरु कृपाचार्य के भानजे थे। द्रोणाचार्य ने ही कौरवों और पांडवों को शस्त्र विद्या में पारंगत बनाया था। महाभारत के युद्ध के समय गुरु द्रोण ने हस्तिनापुर राज्य के प्रति निष्ठा होने के कारण कौरवों का साथ देना उचित समझा। अश्वत्थामा भी अपने पिता की भाँति शास्त्र व शस्त्र विद्या में निपुण थे। पिता-पुत्र की जोड़ी ने महाभारत के युद्ध के दौरान पांडवों की सेना को छिन्न-भिन्न कर दिया था। पांडव सेना को हतोत्साहित देख श्रीकृष्ण ने द्रोणाचार्य का वध करने के लिए युधिष्ठिर से कूटनीति का सहारा लेने को कहा। इस योजना के तहत युद्धभूमि में यह बात फैला दी गई कि अश्वत्थामा मारा गया है। जब द्रोणाचार्य ने धर्मराज युधिष्ठिर से अश्वत्थामा की मृत्यु की सत्यता जाननी चाही तो युधिष्ठिर ने जवाब दिया कि 'अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा' (अश्वत्थामा मारा गया है, लेकिन मुझे पता नहीं कि वह नर था या हाथी)। यह सुन गुरु द्रोण पुत्र...